Saturday, July 27, 2019

और मैं कविता लिख नहीं पाता

 और मैं कविता लिख नहीं पाता .... 

बरसात आंधी,
मिटठी की खुशबु सोंधी सोंधी। 
बादलों का उमडना घुमड़ना ,
चकवा का चकई के बगैर तरपना।
चन्चल मदमस्त शाम ,
फीका फीका सा आसमान। 
कली भौरे का प्यार ,
मदहोशी का संचार !
न जाने मैं क्यों नहीं  समझता , और मैं कविता नहीं लिख पाता ..... 

                         कही पत्थर तो कही फूल ,
                         कवि तो कहते इसमें  भी है दिल। 
                         पर मैंने तो एक पत्थर दिल को ,
                         नाजुक फूलो की  चोट से टूटते देखा , 
                         पल पल आंशु बहते रोते बिलखते देखा। 
                          फिर मैं सोचता ,आखिर दिल क्यों है रोता , और मैं कविता नहीं लिख पाता ...

फिर आज जिंदगी कुछ उदास हुई ,
हमसफ़र कही खो गया , दिल की कसक ही साथ हुई।
फिर बैठा कागज और स्याही लेके कुछ लिखने को,
पर क्या करुँ ....... ,
बरसात आंधी , सोंधी सोंधी ,
ये सब तथ्य मुझे नहीं भाता , और मैं कविता नहीं लिख पाता ...