और मैं कविता लिख नहीं पाता ....
बरसात आंधी,
मिटठी की खुशबु सोंधी सोंधी।
बादलों का उमडना घुमड़ना ,
चकवा का चकई के बगैर तरपना।
चन्चल मदमस्त शाम ,
फीका फीका सा आसमान।
कली भौरे का प्यार ,
मदहोशी का संचार !
न जाने मैं क्यों नहीं समझता , और मैं कविता नहीं लिख पाता .....
कही पत्थर तो कही फूल ,
कवि तो कहते इसमें भी है दिल।
पर मैंने तो एक पत्थर दिल को ,
नाजुक फूलो की चोट से टूटते देखा ,
पल पल आंशु बहते रोते बिलखते देखा।
फिर मैं सोचता ,आखिर दिल क्यों है रोता , और मैं कविता नहीं लिख पाता ...
फिर आज जिंदगी कुछ उदास हुई ,
हमसफ़र कही खो गया , दिल की कसक ही साथ हुई।
फिर बैठा कागज और स्याही लेके कुछ लिखने को,
पर क्या करुँ ....... ,
बरसात आंधी , सोंधी सोंधी ,
ये सब तथ्य मुझे नहीं भाता , और मैं कविता नहीं लिख पाता ...
बरसात आंधी,
मिटठी की खुशबु सोंधी सोंधी।
बादलों का उमडना घुमड़ना ,
चकवा का चकई के बगैर तरपना।
चन्चल मदमस्त शाम ,
फीका फीका सा आसमान।
कली भौरे का प्यार ,
मदहोशी का संचार !
न जाने मैं क्यों नहीं समझता , और मैं कविता नहीं लिख पाता .....
कही पत्थर तो कही फूल ,
कवि तो कहते इसमें भी है दिल।
पर मैंने तो एक पत्थर दिल को ,
नाजुक फूलो की चोट से टूटते देखा ,
पल पल आंशु बहते रोते बिलखते देखा।
फिर मैं सोचता ,आखिर दिल क्यों है रोता , और मैं कविता नहीं लिख पाता ...
फिर आज जिंदगी कुछ उदास हुई ,
हमसफ़र कही खो गया , दिल की कसक ही साथ हुई।
फिर बैठा कागज और स्याही लेके कुछ लिखने को,
पर क्या करुँ ....... ,
बरसात आंधी , सोंधी सोंधी ,
ये सब तथ्य मुझे नहीं भाता , और मैं कविता नहीं लिख पाता ...
No comments:
Post a Comment